
पिछले कुछ वर्षों में “Jeffrey Epstein” एक ऐसा नाम बन गया है जिसने दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में सार्वजनिक की गई ‘Epstein Files’ ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
लेकिन आखिर ये फाइल्स क्या हैं, और इनमें ऐसा क्या है जो पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है?
आइए, इस काले अध्याय की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।
कौन था जेफरी एपस्टीन?
जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जो अपनी बेशुमार दौलत से ज्यादा अपने हाई-प्रोफाइल संपर्कों के लिए जाना जाता था। उसके दोस्तों की सूची में राष्ट्रपति, राजकुमार, अरबपति और वैज्ञानिक शामिल थे।
हालांकि, इस चमक-धमक के पीछे एक भयानक सच्चाई छिपी थी। एपस्टीन पर एक अंतरराष्ट्रीय सेक्स ट्रैफिकिंग रिंग चलाने का आरोप था, जिसमें वह कम उम्र की लड़कियों का शोषण करता था और उन्हें अपने शक्तिशाली दोस्तों के पास भेजता था।
‘एपस्टीन फाइल्स’ क्या हैं? (What is Epstein Files?)
ये फाइल्स असल में कोर्ट के वे दस्तावेज हैं जो वर्जीनिया गफ्रे (Virginia Giuffre) द्वारा एपस्टीन की सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल (Ghislaine Maxwell) के खिलाफ किए गए मानहानि के मुकदमे से संबंधित हैं।
कई सालों तक ये नाम ‘सीलबंद’ (गुप्त) रखे गए थे। लेकिन जनवरी 2024 में, अमेरिकी अदालत के आदेश के बाद हजारों पन्नों के इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करना शुरू किया गया। इन फाइल्स में उन लोगों के नाम और गवाहियां शामिल हैं जो एपस्टीन के निजी द्वीप, विमान या घरों पर देखे गए थे।
Epstein Files में किन बड़े नामों का जिक्र है?
दस्तावेजों में करीब 150 से ज्यादा लोगों के नाम सामने आए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि नाम होने का मतलब यह नहीं है कि वे सभी दोषी हैं, लेकिन एपस्टीन के साथ उनके संबंधों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
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प्रिंस एंड्रयू: ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य, जिन पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगे।
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बिल क्लिंटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति, जिनका नाम दस्तावेजों में कई बार आया है (हालांकि उन्होंने किसी भी गलत काम से इनकार किया है)।
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डोनाल्ड ट्रंप: उनका नाम भी एपस्टीन के परिचित के रूप में सामने आया, हालांकि फाइल्स में उन पर किसी अपराध का सीधा जिक्र नहीं है।
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स्टीफन हॉकिंग: मशहूर वैज्ञानिक की एक तस्वीर एपस्टीन के द्वीप पर देखी गई थी, जिसने सबको हैरान कर दिया।
क्या एपस्टीन फाइल्स में भारतीय लोग या PM मोदी का नाम है?
जब से Epstein Files सार्वजनिक हुई हैं, सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन दस्तावेजों की हकीकत कुछ इस प्रकार है:
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PM मोदी का नाम: आधिकारिक कोर्ट फाइल्स (Official Court Documents) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहीं भी कोई जिक्र नहीं है। सोशल मीडिया पर इस तरह के जो भी दावे किए गए हैं, वे पूरी तरह से आधारहीन और गलत (Fake News) साबित हुए हैं। एपस्टीन के संपर्कों का दायरा मुख्य रूप से अमेरिकी और यूरोपीय रसूखदारों तक ही सीमित था।
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भारतीयों की मौजूदगी: अब तक जारी किए गए हजारों पन्नों के दस्तावेजों में किसी भी प्रमुख भारतीय नेता, अभिनेता या प्रसिद्ध व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर सामने नहीं आया है। * तथ्य (Facts): फाइल्स में ज्यादातर नाम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों, हॉलीवुड सितारों और ब्रिटिश राजघराने से जुड़े हुए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में केवल उन लोगों के नाम हैं जो कभी एपस्टीन के किसी इवेंट या कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे, लेकिन उनमें से कोई भी प्रमुख भारतीय हस्ती नहीं है।
लिटिल सेंट जेम्स: ‘पाप का द्वीप’
एपस्टीन के पास वर्जिन आइलैंड्स में एक निजी द्वीप था जिसे ‘लिटिल सेंट जेम्स’ कहा जाता था। स्थानीय लोग इसे “पीडोफाइल आइलैंड” (Pedophile Island) के नाम से बुलाते थे। फाइल्स से पता चलता है कि यहाँ बड़ी हस्तियों को प्राइवेट जेट (जिसे ‘लोलिता एक्सप्रेस’ कहा जाता था) से लाया जाता था, जहाँ कम उम्र की लड़कियों का यौन शोषण किया जाता था।
एपस्टीन की रहस्यमयी मौत
जुलाई 2019 में एपस्टीन को गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमा शुरू होने से पहले ही, अगस्त 2019 में वह न्यूयॉर्क की एक जेल में मृत पाया गया।
अधिकारियों ने इसे आत्महत्या करार दिया, लेकिन आज भी दुनिया भर में ‘कॉन्स्पिरसी थ्योरीज’ (षड्यंत्र के सिद्धांत) मशहूर हैं कि उसे मार दिया गया ताकि वह शक्तिशाली लोगों के राज न खोल सके।
हमें इससे क्या सीख मिलती है?
एपस्टीन केस केवल एक व्यक्ति के अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि कैसे अत्यधिक पैसा और रसूख कानून से बचने के लिए एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। ये फाइल्स न्याय की दिशा में एक छोटा सा कदम हैं, ताकि पीड़ितों को यह अहसास हो सके कि सच कभी न कभी सामने जरूर आता है।
Epstein Files हमें एक असहज सच्चाई दिखाती हैं, दुनिया उतनी मासूम नहीं है जितनी हमें बताई जाती है। और सबसे खतरनाक बात यह नहीं कि ऐसे लोग मौजूद हैं, सबसे खतरनाक बात यह है कि हम कुछ समय बाद सब भूल जाते हैं।
एपस्टीन फाइल्स अभी भी पूरी तरह से नहीं खुली हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और चेहरों से नकाब उतरने की संभावना है।